Home चंद्रपूर श्रीकृष्ण की दानलीला गुढ तथा संदेशप्रदायक है।-मुरलीमनोहरजी व्यास का प्रतिपादन।

श्रीकृष्ण की दानलीला गुढ तथा संदेशप्रदायक है।-मुरलीमनोहरजी व्यास का प्रतिपादन।

82

✒️सुयोग सुरेश डांगे(विशेष प्रतिनिधी)

   चंद्रपूर(दि.31मे):- भगवान श्रीबालकृष्ण की सभी लीलायें आनंदप्रदायक और संदेशप्रदायक है। गोकुल वृंदावन का दुध – दही माखण कंस के आदेश से मथुरा जाता था। इन चिजों पर गोकुल वृंदावन के लोगों का पहला अधिकार है। ।अत: बालकृष्ण दान घाटी में गोपीयों से दान मांग कर ग्वाल-बालों को बांट देते थे। यह तो हुई लौकिक बात, अलौकिक तथा गुढ भाव तो यह है कि, भगवान श्रीकृष्ण कहते है, तुम मुझे अपना मख्खन के समान मृदु मधुर मन समर्पित कर दो। ऐसे विचार चंद्रपुर के आध्यात्मिक चिंतक तथा साहित्यकार मुरलीमनोहरजी व्यास ने प्रतिपादित किये। श्री गोवर्धननाथ हवेली चंद्रपुर में 28 मई को आयोजित पुरुषोत्तम मास के दानलीला महोत्सव में व्यासजी बोल रहे थे। मुखीया विजय भट्ट और सौ रिना भट्ट ने दान घाटी की सुंदर रचना की।

     व्यासजी ने कहा,भगवान श्रीबालकृष्ण अपने बाल सखाओं के साथ कभी किसी गोपी के घर माखन चोरी करने जाते हैं, तो कभी दान घाटी के संकरे मार्ग को रोक कर दुध – दही – माखन का दान मांगते है। इस में भी गोपीयों को आनंद प्राप्त होता है। गोपीयां दान देने में ना – नुकुर करती है। सवाल-जवाब करती है। एक गोपी पुछती है आज तक तो किसी ने दान नही मांगा। तुम्हें यह अधिकार किसने दिया। श्रीकृष्ण कहते हैं, मै बृजराज कुमार हूँ। मुझे व्यवस्था परिवर्तन करने का, कर लगाने का, दान लेनेका पूरा अधिकार है। वृज का उत्पादन पूरा बाहर नही जावेंगा। इस का उपयोग वृज के लोगों के लिए होना ही चाहिए। देश के उत्पादन पर देशवासीयों का अधिकार होता है।यह भगवान श्रीकृष्ण का समाजवादी दृष्टिकोण है। श्रीकृष्ण यथार्थवादी है।

  श्री गोवर्धननाथ हवेली में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्यमें प्रतिदिन नये – नये उत्सव संध्या 7 बजे से 8 बजे तक होते हैं। इन उत्सवों के दर्शन के साथ ही मुरलीमनोहरजी व्यास श्रीकृष्ण लीलाओं का गायन तथा श्रीकृष्ण लीलाओं की कथायें सुनाते है।

    श्री गोवर्धननाथ हवेली ट्रस्ट मंडल के पदाधिकारि नटवरभाई ढोलकिया, गोपालभाई विराणी, राजूभाई पुरोहित, हेमंतभाई सूचक, आदि ने नगरवासीयों से आवाहन किया है कि प्रतिदिन संध्या 7 बजे से 8 बजे तक होनेवाले दर्शनों के लिए बडी संख्या में उपस्थित होकर लाभ ग्रहण करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here