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प्रश्न आध्यात्माचे उत्तर जीवनाचे पुस्तक में लेखिका की आध्यात्मिक दृष्टि दृष्टिगोचर होती है।- मुरलीमनोहर व्यास का प्रतिपादन।

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चंद्रपूर- केवल भगवान का भजन पूजन करते रहना ही आध्यात्मिकता नही है। आध्यात्मिकता का अर्थ है भौतिक जगत से हटकर पारमार्थिक जगत के संदर्भ में, आत्मा और परमात्मा के साथ स्वयं के अस्तित्व का संबंध खोजना। स्वयं के साथ ही अन्य लोगों और विविध प्राणीयों , तथा प्रकृति के संदर्भ में में गहराई से सोचना। संसार के प्रत्येक प्राणी के प्रति सहानुभूति, प्रेम एवं करुणा आदि के बारे में सोचना।केवल सोचते रहना ही नही अपितु सभी को सुख प्रदान करने का प्रयास करना ही सच्ची आध्यात्मिकता है। प्रश्न आध्यात्माचे उत्तर जीवनाचे इस पुस्तक में लेखिका सौ अरुणाताई खममकर की आध्यात्मिक दृष्टि दृष्टिगोचर होती है। ऐसे विचार चंद्रपुर के आध्यात्मिक चिंतक तथा साहित्यकार मुरलीमनोहर व्यास ने पुस्तक प्रकाशन समारोह में व्यक्त किये।
चंद्रपुर की प्रथितयश प्रकाशन संस्था बाबु आयटम ने इस पुस्तक का प्रकाशन किया है। तुकुम स्थित न्यू इंडिया कानव्हेंट में शनिवार की संध्या बेला में आध्यात्मिक चिंतक तथा साहित्यकार मुरलीमनोहर व्यास के हाथों पुस्तक का प्रकाशन संपन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता संत श्री मनिषभाई महाराज ने की। जेष्ठ शल्यचिकित्सक तथा साहित्यकार डा शरदचंद्र सालफले विशेष अतिथी के रुप में मंचपर विराजमान थे।
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में मनिष महाराज ने कहा, अरुणाताई खममकर की यह पुस्तक जिज्ञासुओं की जिज्ञासा का शमन करनेवाली पुस्तक सिद्ध होंगी। उनके ज्ञान में वृद्धि करनेवाली होंगी। जीवन में हर पग पग पर प्रश्न उठते है। प्रश्नों के उत्तर शास्त्रों के अध्ययन करने से ही प्राप्त होते हैं।
डा शरदचंद्र सालफले ने लेखिका सौ अरुणाताई खममकर को शुभकामनायें देते हुये कहा इस पुस्तक में प्रश्नों के उत्तरों के साथ ही पौराणीक कथाओं के प्रश्नों के साथ ही उठनेवाली कुछ जिज्ञासाओं का शमन करने के लिए संक्षेप में कुछ कथानक भी उल्लेखित किये है , जिससे इस पुस्तक का सौंदर्य और भी निखर गया है।
लेखिका अरुणाताई खममकर ने कहा, बचपन से पौराणिक कथाओं को सुनते हुये अनेक प्रश्न मनमें उठते रहे। उन प्रश्नों के उत्तर मुझे शास्त्रों का अध्ययन करते हुये प्राप्त हुये, उन्हें मैने डायरी में लिखकर रखे। उन्हें प्रकाशित करने का विचार किया। बाबु आयटम के सर्वेसर्वा आशिष देव ने इस पुस्तक को प्रकाशित करने की जिम्मेदारी स्विकार की और आज यह पुस्तक प्रकाशित हो रही है।
समारोह का प्रारंभ अतिथीयों के हाथों दीप प्रज्वलन द्वारा किया गया। अतिथीयों को शाल श्रीफल देकर सम्मानित किया गया।
श्री मनिष महाराज ने लेखिका अरुणाताई खममकर और बाबु आयटम के सर्वेसर्वा आशिष देव को शाल और स्मृति भेंट देकर सम्मानित किया।
बाबु आयटम प्रकाशन संस्था द्वारा यह 44 वीं पुस्तक प्रकाशित हुई तथा सौ अरुणाताई खममकर की 11 वीं पुस्तक प्रकाशित हुई।
प्रकाशन समारोह का सुंदर तथा समयबद्ध नियोजन बाबु आयटम प्रकाशन संस्था के सर्वेसर्वा आशिष देव के मार्गदर्शन में किया गया। समारोह का सुंदर संचालन मंजरी बाटवे ने किया।
बरसती जलधाराओं में भी शहर के गणमान्य रसिक श्रोताओं की उल्लेखनिय उपस्थिती उत्साहवर्धक रही।

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