


✒️सुयोग सुरेश डांगे(विशेष प्रतिनिधी)
चंद्रपूर(दि.7जून):-हमे जीवन में प्रतिदिन 86400 सेकंद प्राप्त होते हैं, उसमें से कभी कोई व्यक्ति हमारा अपमान कर के 10 सेकंद खराब कर देता है। उससे हम परेशान होकर बचे हुये पुरे 86390 सेकंद बरबाद कर देते हैं। क्या यह सही है ? जो होना था सो होगया, आगे क्या करना है वह शांति से सोच कर जिंदगी में खुश रहने का प्रयास करते रहना चाहिए। वृद्धावस्था भगवान से जुड जाने की अवस्था है। घर-परिवार छूटता नही है। आपको वृद्धाश्रम का जीवन प्राप्त हुआ। घर-परिवार से नाता छुट गया अब प्रभु नाम स्मरण से जुड जाओ । ऐसे विचार चंद्रपुर के आध्यात्मिक चिंतक तथा साहित्यकार मुरलीमनोहरजी व्यास ने मप्रतिपादित किये।
चंद्रपुर के मातोश्री वृद्धाश्रम में श्री पुरुषोत्तम मास प्रित्यर्थ शनिवार दि 6 जून से श्रीकृष्ण कथा सत्संग समारोह में मुरलीमनोहरजी व्यास बोल रहे थे। परेशचंद्र शांतिरंजन सरकार एवं निहार हालदार परिवार द्वारा मातोश्री वृद्धाश्रम में यह समारोह आयोजित किया गया।समारोह का समापन अल्पोपहार एवं प्रसाद वितरिण द्वारा किया गया।
व्यासजी ने कहा यह सच है कि, जो लोग संसार को दु:खद मानते हैं उन्हें दु:ख प्राप्त होते हैं और जो संसार को सुखद मानते हैं उन्हे सुख प्राप्त होता है। सुख और दु:ख यह मन की अवस्थायें है।
मनुष्य का मन बहुत ही चंचल है। मन एक जगह टिकता ही नही। मन को भगवान में लगाना कठीन जरुर है लेकिन सतत प्रयत्न करने से निश्चय ही लग सकता है। आप लोग घर-परिवार की चिंता से मुक्त होकर अपना मन निश्चय ही भगवान में लगा सकते हो। मन को स्थिर और शांत करने के लिए श्रीकृष्ण नाम संकीर्तन सबसे सरल उपाय है। श्रीकृष्ण की भक्ति करने के लिए श्रीकृष्ण की कथा सुऩना और श्रीकृष्ण का नाम स्मरण करते रहना चाहिए। आश्रम के जो भी कार्य आपको प्राप्त हुआ हो उसे परमेश्वर का कार्य मानकर प्रभु नाम स्मरण करते हुये करते रहो, जीवन में आनंद प्राप्त होंगा। ऐसा विश्वास व्यासजी ने व्यक्त किया।
कार्यक्रम का प्रारंभ 88 वर्षीय वयोवृद्ध परेशचंद्रजी सरकार के हाथों आश्रम में स्थापित भगवान श्री विठ्ठल रुक्मणीजी का पूजन द्वारा किया गया। सुंदर आयोजन सौ लिपिका सरकार और सौ सपना हालदार ने किया। आश्रम के व्यवस्थापक अंशुल रणदिवे ने सुंदर व्यवस्थापन किया। आश्रम के निवासीयों ने सुंदर भजन प्रस्तुत किये।















