


✒️सुयोग सुरेश डांगे(विशेष प्रतिनिधी)
चंद्रपूर(दि.12जून):-भगवान तो भाव के भुखे है। भगवान कहते है मुझे आपसे धन-दौलत आदि कुछ नही चाहिए आप अपना मन पूर्ण भाव-भक्ति के साथ मुझे अर्पण कर दो। यह बात भगवान श्रीकृष्ण श्रीमद् भागवत ग्रंथ में तथा श्रीमद् भगवद् गीता में अर्जून से कहते है। जो व्यक्ति भगवान का सच्चा भक्त होता है वह भगवान से लौकिक सुख-संपत्ति नही मांगता। वह निष्काम भाव से भक्ति करता रहता है। उसे विश्वास होता है कभी ना कभी भगवान उसकी सुध लेंगे और कृपा करेंगे ही। ऐसे विचार चंद्रपुर के आध्यात्मिक चिंतक तथा साहित्यकार मुरलीमनोहरजी व्यास ने प्रतिपादित किये।
श्री गोवर्धननाथजी हवेली चंद्रपुर में गुरुवार दि 11 जून को एकादशी सत्संग , श्री पुरुषोत्तम मास की एकादशी के दिन आयोजित किया गया। जिसमें व्यासजी बोल रहे थे। भगवान श्री गोवर्धननाथ को फुलों के बंगले में विराजमान किया गया।मुखीयाजी विजय भट्ट ने आरती उतारी।
व्यासजी ने कहा भगवान का एक नाम है चित्त चोर। भगवान भक्तों के मन की बात जानते है। एकबार गोवर्धननाथजी अपने सखा के साथ गोवर्धन पर्वत की घाटी में बैठे थे। एक ग्वालन वहां से गुजरी। उसे प्रभु ने रोक कर कहा, कुंभना को प्यास लगी है, उसे छांछ पिला। वह छांछ देने लगी इतने में प्रभु ने उसकी टोकरी में से एक रोटी उठाली।
वह ग्वालन जाने के बाद प्रभु ने आधी रोटी कुंभनदास को दी।
कुंभनदास ने कहा लाला तेरी चोरी की आदत गयी नही।
कुंभनदास ने रोटी का एक कौर खाते ही कहा अद्भूत स्वाद है, ऐसी रोटी कबहू नही खाई।
प्रभू ने कहा यह साधारण रोटी नही है। इस में इस ग्वालन का प्रेम-स्नेह और भाव-भक्ति भरी हूई है।
यह ग्वालन रोज रोटी बनाते वक़्त मुझे रोटी खिलाने की कामना करती है, लेकिन मुझ तक पहूंच नही पाती। इसलिए आज मैने निश्चय किया की इस की रोटी का भोग लगाकर इसकी मनोकामना को पूर्ण किया जाय।
व्यासजी ने कहा हमने भगवान पर विश्वास रखकर अपना काम शुभ संकल्पों के साथ करते रहना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें की हमारे कार्य से सभी का कल्याण ही होना चाहिए। किसी का अहित नही हो।















