


✒️सुयोग सुरेश डांगे(विशेष प्रतिनिधी)
चंद्रपूर(दि.15मे):-संत किसी भी संप्रदाय के हो भगवान की भक्ति करने का एक ही सिद्धांत है। पुष्टिसंप्रदाय के प्रवर्तक जगद्गुरु श्रीमद् वल्लभाचार्यजी और संत कबीरजी दोनों का भगवान की प्रगाढ भक्ति करने का सिद्धांत एक ही है। दोनों कहते है, संसार करो लेकिन भगवान का विस्मरण मत करो । ऐसे विचार चंद्रपुर के आध्यात्मिक चिंतक तथा साहित्यकार मुरलीमनोहरजी व्यास ने प्रतिपादित किये।
श्री गोवर्धननाथजी हवेली चंद्रपुर में आयोजित एकादशी सत्संग समारोह में बुधवार दि 13 मई को शयन दर्शन के समय “श्रीमद् वल्लभाचार्यजी और संत कबीरजी के भक्ति सिद्धांत” विषय पर व्यासजी बोल रहे थे। श्री यमुना महिला मंडल ने यमुनाष्टक के पाठ किये।
व्यासजी ने कहा श्रीमद् वल्लभाचार्यजी कहते है, भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करने के लिए संसार छोडने की आवश्यकता नही। संसार के सभी कार्य करते रहो लेकिन भगवान का विस्मरण मत होने देना। समस्त जगत को श्रीकृष्णमय देखते रहना। हर कार्य करते हुये सतत मन ही मन श्रीकृष्ण का नाम स्मरण करते रहना। यही बात संत कबीरजी भी कहते है। वे एक दोहे में उदाहरण देते हैं किस तरह प्रभु स्मरण करते हुये कार्य करें।
*” सुमिरण की सुधि यों करो, ज्यौं गागर पनिहार। होले डोलै सुरत में, कहे कबीर विचार।”*
पनिहारिन जल के घडे सिरपर रखकर चलती हुई मार्ग में इधर उधर देखते हुये चलती है। साथ की महिलाओं से तथा मार्ग में मिलनेवालों से बात भी करती है। लेकिन उसका ध्यान सिरपर रखे मटके पर रहता है, कहिं वह गिर न जाय। ठिक इसी तरह संसार के सभी कार्य करते हुये भगवान का नाम स्मरण करते रहना चाहिए।
व्यासजी ने कहा यही भक्ति का सरल मार्ग भी है और कठिन मार्ग भी है। हमारा मन बहूत ही चंचल है। मन को बार-बार भगवान की ओर खिंचना पड़ता है। मन नाम स्मरण करना भुल जाता है, उसे बार-बार याद दिलाना पड़ता है। यह कठीन जरुर है लेकिन असंभव नही।
व्यासजी ने कहा जेष्ठ कृष्ण एकादशी को अपरा एकादशी कहते है। इस दिन भगवान श्रीहरि, विष्णु श्रीकृष्ण की पूजा अवश्य करनी चाहिए।
मुखीयाजी विजय भट्ट ने आरती उतारी। प्रत्येक एकादशी को शयन दर्शन के समय व्यासजी का सत्संग होता है।














