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गणेशोत्सव के दौरान विज्ञापनों में श्री गणेश का अपमानजनक चित्रण! बिना शर्त माफी मांगें अन्यथा कानूनी कार्रवाई का सामना करें; हिंदू जनजागृति समिति ने हैवल्स और न्यूट्रिका कंपनियों को भेजा नोटिस

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जगदीश का. काशिकर,विशेष प्रतिनिधी, ९७६८४२५७५७.

 

मुंबई – गणेशोत्सव के अवसर पर हैवल्स इंडिया लिमिटेड और न्यूट्रिका (बीएन होल्डिंग्स लिमिटेड) नामक दो कंपनियों ने अपने विज्ञापनों में भगवान श्री गणेश का व्यंग्यात्मक और अपमानजनक चित्रण कर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। इस घटना से उत्पन्न हुए तीव्र आक्रोश को देखते हुए हिंदू जनजागृति समिति की ओर से एक कानूनी नोटिस जारी किया गया है, जिसमें तत्काल विज्ञापन वापस लेने और बिना शर्त माफी मांगने की मांग की गई है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं की गईं तो संबंधित कंपनियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मुंबई के प्रभादेवी स्थित सेंचुरी बाज़ार चौक पर हैवल्स कंपनी द्वारा लगाए गए डिजिटल विज्ञापन में भगवान श्री गणेश के शरीर को बिजली के उपकरणों से बना हुआ दिखाया गया, जबकि न्यूट्रिका कंपनी ने अपने खाद्य तेल के कैन को हाथ, पैर और मुकुट लगाकर श्री गणेश के रूप में प्रस्तुत किया। यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि इन दोनों विज्ञापनों से श्री गणेश की पवित्रता का अपमान हुआ है और ‘रचनात्मक विज्ञापन’ के नाम पर आस्था का उपहास किया गया है। समिति के श्री रविंद्र दासारी और श्रीमती स्वाति पांडे की ओर से अधिवक्ता प्रसाद संकपाल, अधिवक्ता प्रथमेश गायकवाड और अधिवक्ता सुरभि सावंत ने संबंधित कंपनियों को नोटिस भेजा है।

यह कृत्य न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करता है, बल्कि भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 153(A), 196, 299, 300, 302 के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295, 295(A), 298, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019, आईटी अधिनियम 2021, ASCI की आचार संहिता और संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का भी उल्लंघन है। ऐसे विज्ञापनों से समाज में धार्मिक तनाव पैदा होने का संकट है और यह पारंपरिक मूर्तिकारों, धार्मिक कार्यकर्ताओं और करोड़ों भक्तों की आस्था पर प्रहार है।

इस नोटिस में हिंदू जनजागृति समिति और शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि, संबंधित विज्ञापनों को तुरंत वापस लिया जाए। सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगी जाए। भविष्य में देवताओं के ऐसे उपयोग पर रोक लगाने का लिखित आश्वासन दिया जाए। मानसिक पीड़ा और धार्मिक अपमान के मुआवजे के रूप में 50 लाख रुपये की राशि पाली अष्टविनायक मंदिर को दान स्वरूप अर्पित की जाए। यदि ये मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो समिति कानूनी रास्ते से संघर्ष करेगी।

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