Home चंद्रपूर अंतर्यामी श्रीकृष्ण पल-पल की घट-घट की जानते हैं-मुरलीमनोहरजी व्यास का प्रतिपादन।

अंतर्यामी श्रीकृष्ण पल-पल की घट-घट की जानते हैं-मुरलीमनोहरजी व्यास का प्रतिपादन।

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✒️सुयोग सुरेश डांगे(विशेष प्रतिनिधी)

चंद्रपूर(दि.23मे):-भगवान श्रीकृष्ण तो अंतर्यामी है। घट-घट की पल-पल की जानते है। उन्होंने अपने भानजे अभिमन्यु को कीर्तिमानभव , यशस्वीभव ऐसा आशीर्वाद दिया, लेकिन चिरंजिवीभव आशीर्वाद नही दिया। महाभारत युद्ध के वक़्त पर भी यही आशीर्वाद सुन कर द्रोपदी ने कारण पुछा कृष्ण ने कहा कल मेरा भानजा ऐसा अद्भुत शौर्य पराक्रम करेंगा जिससे यह युगों-युगों तक गौरव से याद किया जावेंगा। कारण भगवान श्रीकृष्ण जानते थे, कल क्या होने वाला है। भगवान पांडवों के प्राण बचा सकते हैं, फिर अपने सगे भानजे अभिमन्यु के प्राण क्यों नही बचाये ? कारण भगवान जानते थे अभिमन्यु अल्प समय के लिए पृथ्वी पर आये है। उनका इतना ही कर्तव्य था। उसे पूर्णकर वापस अपने धाम जाना है। हमारा जीवन भी ऐसा ही है। हमें भी अपने-अपने कर्तव्य पूर्ण करके वापस जाना है। ऐसे विचार चंद्रपुर के आध्यात्मिक चिंतक तथा साहित्यकार मुरलीमनोहरजी व्यास ने प्रतिपादित किये।

     श्री परेशचंद्र सरकार के आवास पर आयोजित सत्संग समारोह में व्यासजी बोल रहे थे। श्री शांतिरंजन सरकार तथा सौ लिपीका सरकार ने व्यासजी का स्वागत सत्कार शाल श्रीफल देकर किया।

     व्यासजी ने कहा श्रीमद् भागवत कथा श्रीकृष्ण का जीवन चित्रण है। श्रीकृष्ण का जीवन हमारे लिये शिक्षाप्रद है। श्रीकृष्ण का जीवन प्रारंभ होने के पहले ही सगा मामा कंस हत्या करने तैयार बैठा था। जन्म के छठे दिन ही पुतना हत्या करने आती है। एक -डेढ माह के होते ही शकटासुर उत्कच, तृणावर्त राक्षसों के संकट आते है। मथुरा छोडनी पडती है, उपहास सहन करने पडते है फिर भी मुस्कुराते रहते है। इसीलिए श्रीकृष्ण वंदनीय है, पूजनीय है। 

व्यासजी ने कहा श्रीमद् वल्लभाचार्यजी कहते हैं, भगवान श्रीकृष्ण की स्नेह -प्रेम से , भक्ति-भावसे सेवा करो। भगवान से कभी कुछ मांगो मत। वे सर्वेश्वर अंतर्यामी है। हमारे भाग्यमें क्या है, कितना देना है यह सब वे जानते है। जिस तरह मां अपने प्रिय बालक को कब? क्या? कितना भोजन कराना इस बात का ध्यान रखती है। बालक किसी चिज के लिए हठ करे तो भी अतिरिक्त चिज नही देती। ठिक इसी तरह का कार्य हमारे प्रभु हमारे साथ करते है। हमारा काम है कर्म करते रहना और प्रभु को भजते रहना, फल देनेका काम भगवान का है।

   सत्संग समारोह का संयोजन श्री शांतिरंजन सरकार एवं सौ लिपीका सरकार ने किया। संयोजन में विशेष सहयोग श्री निहार हालदार , कुमारेश मिस्त्री, लिपीका मिस्त्री, सचिन शंखारी, बिधान राय, शंकारी राय, डेबु सरकार, दिपीका सिखदर , पुनम सिखदर, पूजा शंखारी ने दिया ।

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